पाकिस्तान से सीमा पार आतंकवाद और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आतंकी ढांचे के खिलाफ भारत की कार्रवाई को लेकर Organisation of Islamic Cooperation (OIC) की टिप्पणी पर भारत ने कड़ा जवाब दिया है। भारत ने OIC पर तथ्यों को नजरअंदाज करने और आतंकवाद के पीड़ित तथा उसे अंजाम देने वालों के बीच अंतर नहीं कर पाने का आरोप लगाया।
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की Sixth Committee में भारत की ओर से बोलते हुए BJP सांसद Biplab Kumar Deb ने OIC की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से आने वाले सीमा पार आतंकवाद से अपने नागरिकों की रक्षा करना भारत का पूरा अधिकार है और आतंकवाद में शामिल होने के परिणाम बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे।
UN में भारत ने OIC को दिया जवाब
West Tripura से लोकसभा सांसद Biplab Kumar Deb ने UN General Assembly की Sixth Committee में ‘Measures to Eliminate International Terrorism’ विषय पर भारत का राष्ट्रीय बयान दिया। इसी दौरान उन्होंने OIC के चेयर की ओर से भारत की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई पर की गई टिप्पणी का जवाब दिया।
Deb ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे के खिलाफ focused और measured कार्रवाई की है। भारत का कहना है कि इन्हीं क्षेत्रों से भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बनाने और उन्हें निर्देशित करने का काम किया गया है।
भारत की ओर से OIC की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए Deb ने कहा कि संगठन का प्रतिनिधि तथ्यों और कल्पना के बीच अंतर नहीं कर पा रहा है और पीड़ित तथा अपराधी को अलग-अलग पहचानने में भी असमर्थ है।
‘आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा का पूरा अधिकार’
Biplab Kumar Deb ने UN में कहा कि पाकिस्तान की ओर से सीमा पार आने वाले आतंकवाद से अपने लोगों की रक्षा करना भारत का अधिकार है।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आतंकवाद में शामिल होने के परिणामों को स्वीकार नहीं किया जाएगा। भारत लंबे समय से पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाता रहा है।
भारत का कहना है कि आतंकवाद केवल किसी एक देश की सुरक्षा की समस्या नहीं है, बल्कि इसका असर अंतरराष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, अर्थव्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं और मानवाधिकारों पर भी पड़ता है।
‘आतंकवाद भारत के लिए रोज की वास्तविकता’
UN में अपने संबोधन के दौरान Deb ने कहा कि भारत आतंकवाद के खतरे को किसी सैद्धांतिक या दूर की समस्या के रूप में नहीं देखता। उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद का लंबे समय तक सामना किया है और यह उसके लिए लगातार बनी रहने वाली चुनौती है।
उन्होंने कहा कि आतंकवाद का सबसे गंभीर असर लोगों के जीवन पर पड़ता है। किसी आम नागरिक को जानबूझकर निशाना बनाना किसी भी परिस्थिति में सही नहीं ठहराया जा सकता।
भारत ने UN में यह भी दोहराया कि आतंकवाद को ‘अच्छे’ और ‘बुरे’ आतंकवाद में बांटकर नहीं देखा जाना चाहिए।
Pahalgam आतंकी हमले का भी किया जिक्र
भारतीय प्रतिनिधि ने Pahalgam आतंकी हमले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2025 में हुए इस हमले में 26 पर्यटकों की मौत हुई थी और इस घटना ने आतंकवाद की गंभीर मानवीय कीमत को एक बार फिर सामने रखा।
भारत ने इस हमले को अपनी संप्रभुता पर हमला बताते हुए कहा कि इसके पीछे ऐसे नेटवर्क थे, जिन्हें भारत के अनुसार सीमा पार से समर्थन, सुरक्षित ठिकाने और अन्य प्रकार की सहायता मिलती रही है।
Deb ने कहा कि दशकों से भारत के लोग सीमा पार आतंकवाद का सामना कर रहे हैं और इस तरह की घटनाओं का प्रभाव केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आम नागरिकों के जीवन पर भी पड़ता है।
‘आतंकवाद मानवता के खिलाफ अपराध’
भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से आतंकवाद के खिलाफ अपनी स्थिति दोहराते हुए कहा कि नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाना किसी भी तरीके से उचित नहीं ठहराया जा सकता।
Deb ने कहा कि आतंकवाद संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों के खिलाफ है और भारत आतंकी हमलों को मानवता के खिलाफ अपराध मानता है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस रुख का भी उल्लेख किया कि एक भी आतंकी हमला बहुत ज्यादा है और एक भी निर्दोष व्यक्ति की जान जाना बहुत बड़ी क्षति है।
Jammu & Kashmir पर OIC की टिप्पणी भी खारिज
भारत ने OIC की ओर से Jammu & Kashmir के संदर्भ में की गई टिप्पणी को भी खारिज किया। Deb ने कहा कि OIC को Jammu & Kashmir का उल्लेख करने के बजाय पाकिस्तान के कब्जे वाले इलाकों में वहां रहने वाले लोगों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
उन्होंने पाकिस्तान के अवैध कब्जे का मुद्दा उठाते हुए खास तौर पर Rawalakot का जिक्र किया। भारत ने आरोप लगाया कि वहां लोगों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दे मौजूद हैं।
Deb ने कहा कि इन मुद्दों को नजरअंदाज करना वास्तविकता से आंखें मूंदने जैसा है।
PoK में विरोध और अशांति का मुद्दा
भारत की ओर से UN में दिए गए बयान में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जारी असंतोष का भी उल्लेख किया गया। बयान में कहा गया कि PoK क्षेत्र में कई महीनों से विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं।
इनमें तथाकथित legislative assembly में 12 विवादित refugee seats सहित कई मुद्दे शामिल हैं। भारत ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों के जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई की गई और हालिया चुनावों को लेकर भी धांधली के आरोप सामने आए।
भारत ने OIC से इस पूरे मामले को निष्पक्ष नजर से देखने की अपील की और कहा कि जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणी करने से पहले संगठन को पाकिस्तान अधिकृत क्षेत्रों में लोगों की स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।
OIC की ओर से Saudi Arabia ने रखा बयान
UN General Assembly की Sixth Committee में OIC की ओर से Saudi Arabia ने बयान दिया। Sixth Committee संयुक्त राष्ट्र महासभा की वह समिति है जो मुख्य रूप से कानूनी और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करती है।
OIC की टिप्पणी के बाद भारत की ओर से दिया गया जवाब इसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों पक्षों के बीच जम्मू-कश्मीर और आतंकवाद को लेकर जारी मतभेद को सामने लाता है।
भारत लगातार यह रुख रखता आया है कि सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने नागरिकों की रक्षा से जुड़ा विषय है। वहीं, भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप भी दोहराए हैं।
भारत का स्पष्ट संदेश
UN में भारत के बयान से एक बार फिर स्पष्ट हुआ कि नई दिल्ली आतंकवाद और जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन की ऐसी टिप्पणी को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है, जिसे वह तथ्यों के विपरीत मानता है।
भारत ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को लेकर वह अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार रखता है। साथ ही, भारत ने दोहराया कि आतंकवाद को किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने वाले हमलों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को स्पष्ट और एकजुट रुख अपनाना चाहिए।
